CG CRIME NEWS: बड़ी बहन ने छोटी बहन की हत्या, खाना बनाने को लेकर उपजा था विवाद, बड़ी बहन ने छोटी कर दी थी हत्या, कोर्ट ने सुनाया आजीवन कारावास

समाचार डेस्क रायगढ़। घरेलू विवाद में अपनी ही छोटी बहन रंजीता कुमारी की हत्या करने वाली बड़ी बहन नेहा कुमारी महतो को सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला 24 अप्रैल 2024 की रात का है, जब घर में हुई मामूली बात ने इतनी भयंकर रूप ले लिया कि परिवार और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

परिवार और घटनास्थल की पृष्ठभूमि

दीनदयाल महतो के घर में तीन बेटियां थीं। बड़ी बेटी रेखा का विवाह हो चुका था। बाकी की दो बेटियां, नेहा (आरोपिया) और रंजीता (मृतका), अपने माता-पिता के साथ रहती थीं।रंजीता घर में सिलाई और छोटे-मोटे घरेलू काम करती थी।
नेहा घरेलू काम और रसोई का जिम्मा संभालती थी।
दोनों बहनों के बीच समय-समय पर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और मारपीट होती रहती थी। पड़ोसियों और परिवार के सदस्यों के अनुसार, यह तनाव महीनों से चल रहा था।

हत्या की रात 

24 अप्रैल 2024, रात लगभग 9 बजे नेहा ने रंजीता से कहा कि वह लौकी छीलकर खाना बनाने में मदद करे।रंजीता ने मना कर दिया और यह कहते हुए कमरे में चली गई कि “मैं खाना नहीं बनाऊंगी।”नेहा ने खाना बना दिया, लेकिन रंजीता ने खाने के बाद गुस्से में कहा कि “मैंने खा लिया।”इस मामूली विवाद ने नेहा को इतना गुस्सा दिलाया कि उसने हत्या करने का निर्णय लिया। नेहा ने पिता को शक्कर लाने भेजा और रसोई से लोहे का खलबट्टा (मूसल) उठाया।उसने रंजीता के सिर पर पहला वार किया।
रंजीता के चिल्लाने पर डरते हुए नेहा ने दोबारा सिर पर वार किया और शव को कंबल से ढककर कमरे की लाइट बंद कर दी।

हत्या के बाद का व्यवहार

नेहा ने ऐसा अभिनय किया कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
उसने अपनी मां को जगाया और उनके साथ खाना खाया।
मां ने रंजीता के बारे में पूछताछ की तो नेहा ने कहा कि “खाना खाकर सो गई है।”
अगली सुबह पिता को रंजीता को उठाने के लिए भेजा गया।
पिता ने कमरे में जाकर देखा कि रंजीता खून से लथपथ मृत पड़ी है।

पुलिस जांच और गिरफ्तारी

पिता ने तुरंत कोतरा रोड थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शव का मर्ग पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
जांच में नेहा महतो पर संदेह हुआ और पूछताछ की गई।
गहराई से पूछताछ करने पर नेहा ने हत्या स्वीकार कर ली।
पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

अदालत का फैसला

सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार जैन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।अदालत ने मामले की पूरी पड़ताल, गवाहों और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।नेहा को धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (सबूत नष्ट करना/छिपाना) के तहत दोषी ठहराया गया।अदालत ने नेहा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

कानूनी पहलू और धाराएँ

धारा 302: हत्या के लिए।धारा 201: अपराध छुपाने या सबूत मिटाने का प्रयास।इस मामले में पुलिस और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हत्या जानबूझकर और योजनाबद्ध रूप से की गई।

सोशल मीडिया और आम जनता की प्रतिक्रिया

इस घटना की जानकारी फैलते ही सोशल मीडिया पर गुस्सा और आक्रोश देखने को मिला।ट्विटर और फेसबुक पर #RaiGarhMurder #JusticeForRanjita जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।लोग कह रहे हैं कि घरेलू विवाद में मामूली बातों पर इतनी गंभीर प्रतिक्रिया मानवता और समाज के लिए चिंता का विषय है।कई लोगों ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं में कठोर कानून और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

परिवार और पड़ोसियों का बयान

परिवार के सदस्यों का कहना है कि नेहा और रंजीता के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद और मारपीट होती रहती थी।
पड़ोसी बताते हैं कि घटना की रात भी बहनें झगड़ रही थीं, लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि यह हत्या तक जा सकती है।

निष्कर्ष

रायगढ़ का यह मामला दिखाता है कि घर के अंदर मामूली विवाद भी कभी-कभी जीवन का बड़ा संकट बन सकते हैं।
एक पल का गुस्सा और आवेश एक बहन की जान ले सकता है।अदालत का फैसला यह संदेश देता है कि घरेलू हिंसा और हत्या में कोई छूट नहीं है। समाज को यह समझना होगा कि भावनाओं पर नियंत्रण और घरेलू विवाद का समाधान जरूरी है।



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