Ambikapur News: अंबिकापुर: कैदी ने प्राइवेट पार्ट में डाली पेंसिल — इमरजेंसी ऑपरेशन से बची जान

अंबिकापुर News Junction | 25 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ के केन्द्रीय जेल अंबिकापुर से एक चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। हत्या के एक दोषी कैदी ने अपने प्राइवेट पार्ट (पेशाब नली) में लगभग 4 सेंटीमीटर लंबी पेंसिल डाल दी। पांच दिन तक दर्द, सूजन और रक्तस्राव झेलने के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इमरजेंसी सर्जरी कर पेंसिल निकाल ली गई और उसकी जान बचाई गई। यह घटना न केवल चिकित्सा दृष्टि से खतरनाक थी, बल्कि जेल सुरक्षा, कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

कैदी ने प्राइवेट पार्ट में डाला पेंसिल
ऑपरेशन करते डाक्टरों की टीम, इनसेट में पेंसिल।
घटना की पूरी जानकारी

केन्द्रीय जेल अंबिकापुर में बंद एक कैदी — जो हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था — को कुछ दिनों से पेट दर्द और पेशाब न रुकने की शिकायत थी। जेल के अंदर प्राथमिक इलाज के बाद भी उसकी तबीयत बेहतर नहीं हुई। धीरे-धीरे प्राइवेट पार्ट में सूजन और रक्तस्राव शुरू हुआ। स्थिति बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उसे मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती कराया।

सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. एसपी कुजूर तथा मेडिकल टीम ने एक्स-रे और अन्य जांच की, जिनमें पेशाब नली में किसी लंबी वस्तु के फंसने की आशंका दिखाई दी। इमरजेंसी में ऑपरेशन किया गया और पेशाब नली से लगभग 4 सेंटीमीटर लंबी पेंसिल निकाली गई। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. कांता, डॉ. इंद्रनील और एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. शिवम शामिल थे। ऑपरेशन सफल रहा और मरीज को आगे की निगरानी में रखा गया।

ऑपरेशन का महत्त्वपूर्ण विवरण

  • जांच: एक्स-रे और प्रारम्भिक ब्लड टेस्ट
  • ऑपरेशन का प्रकार: इमरजेंसी सर्जिकल एक्सट्रैक्शन (स्थानीय/जनरल एनेस्थीसिया पर निर्भर)
  • निकाली गई वस्तु: लगभग 4 सेमी लंबी पेंसिल
  • स्थिति: ऑपरेशन सफल; मरीज वर्तमान में स्टेबल और निगरानी में

कैदी ने क्यों ऐसा किया — जेल प्रशासन की बयानी

जेल अधीक्षक अक्षय राजपूत ने मीडिया को बताया कि कैदी सरल और शांत स्वभाव का माना जाता है और उसे जेल के अंदर कुछ जिम्मेदारियां भी दी गई थी। पूछताछ में कैदी ने कहा कि उसे बार-बार खुजली और जलन की शिकायत रहती थी और उसने रहत पाने के उद्देश्य से पेंसिल डाल ली। प्रशासन के अनुसार पेंसिल उसे लिखने-पढ़ने की सुविधा के लिए दी गई थी; दुर्भाग्यवश इसका दुरुपयोग हुआ।

अधिकारियों ने बताया कि मामले की तहकीकात चल रही है और कैदी की मानसिक स्थिति की भी चिकित्सा जांच कराई जाएगी। जेल के अंदर मिलने वाली चीजों की सूची और निगरानी प्रक्रिया की समीक्षा का आदेश भी दिया गया है।

मेडिकल एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

डॉ. एसपी कुजूर ने कहा, "पेशाब नली जैसी संवेदनशील संरचना में कोई भी बाहरी वस्तु डालना बेहद खतरनाक है। इससे मूत्र प्रवाह बंद हो सकता है, तत्काल संक्रमण, घाव और लंबे समय तक स्थायी क्षति हो सकती है। समय पर इलाज न मिला तो सेप्सिस और किडनी फेल्योर जैसी जटिलताएँ भी हो सकती थीं।"

मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शुरुआती दिक्कतों को नज़रअंदाज़ न करना चाहिए क्योंकि मरीज अक्सर शर्म या कलंक के कारण देर करते हैं, जिससे जटिलताएँ बढ़ जाती हैं।

तत्काल जोखिम

  • पेशाब बंद होना (Urinary retention)
  • उत्कट दर्द और तीव्र रक्तस्राव
  • स्थानीय ऊतक क्षति

दीर्घकालिक/गंभीर जोखिम

  • संक्रमण और सेप्सिस
  • किडनी तक फैलने वाली जटिलताएँ
  • स्थायी मूत्रनली संकुचन/दूरी (Stricture)

दुनिया भर में दर्ज कुछ समान केस (सारांश)

  • चीन, 2019: नाबालिग ने चार्जिंग केबल डाल दी; इमरजेंसी ऑपरेशन द्वारा निकाला गया।
  • अमेरिका, 2021: एक व्यक्ति की मूत्र नली से स्टील वायर निकाली गई थी।
  • भारत (केरल), 2020: रिपोर्ट में ऐसा अनोखा केस मिला जिसमें मछली मूत्र नली में फंसी मिली।
  • यूरोप: अनेक रिपोर्टें मिलीं जहां मानसिक अस्थिरता में लोग असामान्य वस्तुएँ डाल लेते हैं।

मेडिकल लिटरेचर में ऐसे केस दुर्लभ होते हुए भी मौजूद हैं, और अक्सर ये मानसिक स्वास्थ्य, गलत जानकारी या असामान्य उत्तेजना से जुड़े पाए गए हैं।

जेल सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी

यह घटना जेल प्रणाली की निगरानी और बंदियों के लिए उपलब्ध वस्तुओं के नियंत्रण पर सवाल उठाती है। जेलों को ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की सलाह दी जाती है:

  • कंट्रोल्ड वस्तुओं की सूची अपडेट करना और नियम सख्त करना
  • शारीरिक शिकायतों की त्वरित चिकित्सा स्क्री닝
  • नियमित मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन और काउंसलिंग सेवा प्रदान करना
  • जेल स्टाफ के प्रशिक्षण में स्वास्थ्य और मानसिक चेतना शामिल करना

काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर ज़ोर

विशेषज्ञ बलों का सुझाव है कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण आवश्यक है। लंबी अवधि की कैद, सामाजिक पृथकता और पारिवारिक टूटन कैदियों में डिप्रेशन और एंग्जायटी का कारण बनते हैं। समय पर परामर्श और हस्तक्षेप से ऐसे खतरनाक फैसले रोके जा सकते हैं।

निष्कर्ष

अंबिकापुर का यह मामला अनूठा और चौंकाने वाला है, परन्तु यह समाज को एक गंभीर चेतावनी देता है। मेडिकल टीम की तत्परता ने कैदी की जान बचाई, पर यह घटना जेल प्रशासन, चिकित्सा सेवा और सामाजिक सहायताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

जेल प्रशासन ने मामले की गहन जांच और कैदी की मानसिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। आगे के अपडेट मिलने पर इस रिपोर्ट को ताज़ा किया जाएगा।

© News Junction — रिपोर्ट तैयार: लोकल रिपोर्टिंग, जेल प्रशासन और मेडिकल टीम के बयानों के आधार पर।

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