न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) संविदा कर्मचारियों की हड़ताल लगातार तेज होती जा रही है। अब यह हड़ताल 27 दिन से ज्यादा समय से जारी है। स्वास्थ्य सेवाएँ चरमराने लगी हैं और सरकार दबाव में आ गई है।
राज्य सरकार ने बड़ा अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि सभी NHM कर्मचारी 16 सितंबर की शाम तक काम पर लौट आएं, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त (Termination) कर दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी के मुताबिक हड़ताल पर बैठे करीब 16,000 पदों को शून्य मान लिया जाएगा और कर्मचारियों को नोटिस देकर नौकरी से हटाया जा सकता है।
हड़ताल की शुरुआत और पृष्ठभूमि
NHM संविदा कर्मचारियों ने 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी।इनकी 10 प्रमुख मांगें हैं, जिनमें सबसे अहम –
नौकरी का नियमितीकरण
समान काम के लिए समान वेतन
पेंशन और बीमा योजना
मातृत्व और अन्य सुविधाओं का लाभ
लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी करने की गारंटी
पिछले कई वर्षों से कर्मचारियों ने ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन के जरिए अपनी आवाज़ उठाई, लेकिन सरकार ने कोई ठोस आश्वासन लिखित रूप में नहीं दिया। इसी कारण कर्मचारियों का आक्रोश अब लंबे धरना आंदोलन में बदल गया है।
स्वस्थ्य सेवाओं पर असर
27 दिन से हड़ताल जारी रहने के कारण छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और उपस्वास्थ्य केंद्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
OPD सेवाएं प्रभावित हैं
ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण और मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है,कई जिलों में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को दिक्कत हो रही है।सरकार का कहना है कि मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कर्मचारियों की कमी साफ तौर पर महसूस की जा रही है।
विरोध का अनोखा तरीका
रायपुर के तूता धरना स्थल पर हजारों NHM कर्मचारी डटे हुए हैं।अपने विरोध को अनोखे अंदाज में जताने के लिए कर्मचारियों ने “रोज़गार मेला” लगाया।
- किसी ने गुपचुप का ठेला लगाया
- किसी ने भेलपुरी, फरा और चीला बेचना शुरू किया
- कुछ कर्मचारी ऑटो चलाते और बर्तन धोते भी दिखे
इस प्रदर्शन का मकसद सरकार को यह दिखाना है कि अगर नौकरी छिनी तो वे सड़क पर आ जाएंगे।
सरकार की सख्ती
स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही 25 NHM कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है।इन कर्मचारियों पर आरोप था कि उन्होंने आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। इसके विरोध में 14,000 से ज्यादा संविदा कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। अब सरकार ने 16 सितंबर की डेडलाइन तय कर दी है। इसके बाद अगर कर्मचारी काम पर नहीं लौटते तो बड़े पैमाने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई हो सकती है।
कांग्रेस का तीखा हमला
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है।
कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा “एनएचएम कर्मचारियों की मांग बिल्कुल जायज हैं, लेकिन भाजपा सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान वादा किया गया था कि उनकी नौकरी नियमित होगी। यह वादा प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी का हिस्सा था। अब जब निभाना ही नहीं था तो झूठा वादा क्यों किया गया?”
कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा –“समाधान निकालने के बजाय सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। इससे सभी सरकारी कर्मचारियों में गलत संदेश जाएगा।”
डबल इंजन सरकार पर सवाल
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा चुनाव के समय गारंटी देकर सत्ता में आई, लेकिन अब कर्मचारियों से किया वादा भूल गई।उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि NHM कर्मचारियों का नियमितीकरण राज्य सरकार का विषय है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि “डबल इंजन सरकार” कर्मचारी हितों पर चुप क्यों है?
कर्मचारियों की 10 प्रमुख मांगें
1. संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
2. समान काम का समान वेतन
3. बीमा और पेंशन योजना
4. मातृत्व और पितृत्व अवकाश
5. प्रोमोशन नीति
6. सर्विस सुरक्षा
7. समय पर वेतन भुगतान
8. ग्रेच्युटी और अन्य लाभ
9. मेडिकल इंश्योरेंस कवर
10. सेवा समाप्ति पर सेटलमेंट
आगे क्या?
16 सितंबर तक का अल्टीमेटम बेहद अहम है। अगर कर्मचारी काम पर लौटते हैं तो सरकार बातचीत की टेबल पर आ सकती है। लेकिन अगर हड़ताल जारी रही तो हजारों NHM कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में NHM Employees Strike 2025 अब सिर्फ रोजगार का सवाल नहीं रह गया, बल्कि यह सरकार और कर्मचारियों के बीच आमना-सामना बन गया है। सरकार की सख्ती और कांग्रेस के विरोध के बीच, आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। अब सबकी नजर 16 सितंबर की शाम पर है — जब तय होगा कि समाधान निकलेगा या टकराव और बढ़ेगा।
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