न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी/आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की लगातार बड़ी कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को रायगढ़ जिले के घरघोड़ा में एसीबी बिलासपुर की टीम ने NTPC तिलाईपाली कार्यालय रायकेरा के उप महा प्रबंधक विजय दुबे को 4.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।यह अब तक की छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद की सबसे बड़ी राशि की ट्रैप कार्रवाई बताई जा रही है।
कैसे हुआ पूरा मामला?
शिकायतकर्ता सौदागर गुप्ता ने 13 सितंबर को एसीबी बिलासपुर इकाई को शिकायत दी थी कि NTPC द्वारा अधिग्रहित भूमि और मकान के एवज में पुनर्वास राशि का भुगतान रोका जा रहा है। कुल 30 लाख की राशि में से 14 लाख रुपए खाते में आ चुके हैं, लेकिन शेष 16 लाख रुपए दिलाने के बदले विजय दुबे ने 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।
पहले ही वह 50 हजार ले चुका था और अब शेष 4.50 लाख रुपए की मांग कर रहा था। शिकायत की जांच सही पाई गई और मंगलवार को घरघोड़ा स्थित गोमती पेट्रोल पंप के पास ट्रैप प्लान तैयार किया गया।
शिकायतकर्ता जैसे ही तय रकम लेकर पहुँचा, दुबे ने अपनी कार में बैठकर रकम ली और उसी दौरान एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। मौके से पूरी राशि जब्त कर ली गई।
रायगढ़ में 2025 की अन्य बड़ी एसीबी कार्रवाइयाँ
रायगढ़ जिले को एसीबी की सबसे ज्यादा कार्रवाइयों वाला जिला कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इस साल अब तक 8 से अधिक बड़ी कार्रवाई हो चुकी हैं ।
1. शिक्षा विभाग (जनवरी 2025):
खरसिया ब्लॉक में पदस्थ एक प्रधान पाठक को शिक्षकों की पदस्थापना फाइल आगे बढ़ाने के एवज में ₹25,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।
2. नापतौल विभाग (मार्च 2025):
रायगढ़ नापतौल विभाग का निरीक्षक दुकानदारों से लाइसेंस नवीनीकरण के नाम पर अवैध वसूली करते पकड़ा गया। उससे ₹40,000 की राशि बरामद हुई।
3. घरघोड़ा तहसील (जून 2025):
पटवारी को नामांतरण और खसरा नकल निकालने के एवज में ₹15,000 लेते गिरफ्तार किया गया।
4. NTPC रिश्वत प्रकरण (सितंबर 2025):
उप महा प्रबंधक विजय दुबे ₹4.50 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए।इन घटनाओं ने रायगढ़ को भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे चर्चित जिला बना दिया है।
छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में 2025 की एसीबी कार्रवाई
केवल रायगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एसीबी ने कई बार भ्रष्ट अधिकारियों को दबोचा है।
रायपुर (फरवरी 2025): नगर निगम का सहायक अभियंता ₹60,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।
दुर्ग (अप्रैल 2025): स्वास्थ्य विभाग का लिपिक डॉक्टर की फाइल क्लियर करने ₹20,000 लेते पकड़ा गया।
कोरबा (जुलाई 2025): बिजली विभाग का जूनियर इंजीनियर ₹45,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।
बिलासपुर (अगस्त 2025): तहसील कार्यालय का कर्मचारी नामांतरण कार्य में ₹10,000 लेते पकड़ा गया।
कुल मिलाकर 2025 में अब तक छत्तीसगढ़ में 15 से अधिक छापे मारे जा चुके हैं।
रिश्वतखोर अधिकारियों पर असर – नौकरी और करियर खत्म
एसीबी की कार्रवाई के बाद रिश्वतखोर अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत केस दर्ज होता है।प्रारंभिक स्तर पर निलंबन किया जाता है।विभागीय जांच शुरू होती है।कोर्ट में ट्रायल चलता है और दोषी पाए जाने पर बर्खास्तगी व जेल की सजा दोनों हो सकती हैं।कई मामलों में आरोपी की संपत्ति की भी जांच की जाती है और disproportionate assets मामले दर्ज होते हैं। यानी एक बार एसीबी के जाल में फँसे तो अधिकारी की पूरी सर्विस दांव पर लग जाती है।
जनता को क्या संदेश?
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों का सीधा संदेश है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जनता को अब रिश्वत देने के बजाय शिकायत दर्ज कराने का विकल्प मिल रहा है।
आम नागरिकों में विश्वास बढ़ रहा है कि शिकायत करने पर कार्यवाही होगी।सरकारी विभागों में भी डर का माहौल है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में एसीबी की यह लगातार कार्रवाइयाँ दिखाती हैं कि सरकार और जांच एजेंसियाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त हैं। रायगढ़ जिले में ही इस साल कई बड़े खुलासे हुए हैं और ताज़ा मामला (NTPC उप महा प्रबंधक विजय दुबे) प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा ट्रैप है। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में प्रदेश की सरकारी व्यवस्था में ईमानदारी और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
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